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पेट्रोल मूल्यवृद्धि के खिलाफ लाखों कारों की कतार का सच



नई दिल्ली। एक तरफ भारत में पेट्रोल मूल्यवृद्धि के खिलाफ राजनीतिक पार्टियों का लगातार विरोध जारी है, वहीं सोशल मीडिया में एक खबर वायरल हो रही है कि पेट्रोल की ज्यादा कीमतों के विरोध में जर्मनी के लोगों ने लाखों कारों को सड़क पर ही छोड़ दिया।


इस संदेश में दावा किया गया है कि जर्मनी के नागरिकों ने ऐसा करके पेट्रोल मूल्य वृद्धि का विरोध किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान लाखों लोगों ने अपनी कारों को बीच सड़क पर ही छोड़ दिया और पैदल घर की ओर कूच कर गए। दअरसल, उन्होंन यह कदम जर्मन सरकार पर दबाव बनाने के लिए किया है ताकि पेट्रोल की कीमतें कम हो सकें।



इस संदेश के साथ सड़क पर कारें खड़ी हुई दिखाई गई हैं, साथ ही उनके पास खड़े लोगों को दिखाया गया है। गौरतलब है कि जर्मनी में पेट्रोल की कीमतें भारत से ज्यादा हैं। भारत में जहां पेट्रोल के भाव 86 रुपए के आसपास चल रहे हैं, वहीं जर्मनी में इसकी कीमत 115 रुपए के आसपास है।


यही कारण था कि लोगों ने खासकर भारतीयों ने इस फोटो पर भरोसा किया और हकीकत जानें बिना एक दूसरे से शेयर भी किया। मगर यह खबर पूरी तरह झूठी है। हालांकि इस फोटो को ध्यान से और थोड़ा बड़ा करके देखें तो असलियत का खुलासा खुद ब खुद हो जाता है।






यह है हकीकत : दरअसल, इस फोटो का जर्मनी के विरोध प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। यह फोटो चीन का है, जहां 2010 में धुंध और भारी ट्रकों के चलते करीब 100 किलोमीटर लंबा जाम लग गया था। जानकारी के मुताबिक यह जाम करीब 12 दिन तक चला। बताया जाता है कि कोयला ले जा रहे इन ट्रकों की गति मात्र 2 मील प्रतिदिन थी, जो कि ट्रैफिक जाम की मुख्य वजह बनी।





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